यूक्रेन ने बश्किरतोस्तान और वोल्गोग्राड में दो प्रमुख रूसी तेल रिफाइनरियों पर सटीक हमले किए, जिससे रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई। रूस के तेल बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने वाले व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में इन हमलों ने रूस की तेल प्रसंस्करण क्षमता को काफी कम कर दिया है, जिससे देश भर में ईंधन की कमी और कीमतों में वृद्धि हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रणनीति रूस के युद्ध प्रयासों को प्रभावी ढंग से कमजोर करती है, इसके बजट और जनता के मनोबल को प्रभावित करती है, भले ही रूस निर्यात प्रतिबंधों के माध्यम से स्थिति को कम करने और महंगे रक्षात्मक उपायों की खोज करने का प्रयास कर रहा हो। इस व्यवधान से रूस के तेल उद्योग की भेद्यता और यूक्रेन में युद्ध के वित्तपोषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया है।
Prepared by Rachel Morgan and reviewed by editorial team.
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