इथियोपिया ने नील नदी पर अफ़्रीका के सबसे बड़े जलविद्युत बांध, ग्रैंड इथियोपियन पुनर्जागरण बांध (GERD) का उद्घाटन किया है, इसके बावजूद नीचे की ओर स्थित देशों सूडान और मिस्र को चिंता है। वर्षों से चले आ रहे बातचीत से जल प्रवाह प्रबंधन पर कोई समझौता नहीं हो पाया है। सूडान और मिस्र ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और जल सुरक्षा को खतरे का हवाला देते हुए "गंभीर परिणामों" की चेतावनी दी है। इथियोपिया का कहना है कि यह बांध सभी को लाभान्वित करेगा, बिजली और बाढ़ नियंत्रण प्रदान करेगा, साथ ही 1959 की नील संधि को अप्रचलित बताता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हालांकि अभी तक प्रभाव नहीं देखे गए हैं, लेकिन भविष्य में सूखे से सहकारी समझौते के बिना समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
Prepared by Rachel Morgan and reviewed by editorial team.
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