2010 में नासा द्वारा वित्तपोषित एक अध्ययन ने कैलिफ़ोर्निया की एक झील में आर्सेनिक-आधारित जीवाणु, GFAJ-1 की खोज का दावा किया, जिससे जीव विज्ञान और बाह्यग्रहीय जीवन की खोज में क्रांति आने की संभावना थी। इस घोषणा ने महत्वपूर्ण उत्साह उत्पन्न किया, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय से तत्काल आलोचना का सामना करना पड़ा। वैज्ञानिकों ने अध्ययन की कार्यप्रणाली में कमियों की ओर इशारा किया, जिसमें अपर्याप्त प्रयोग और संभावित संदूषण शामिल थे, जिससे आर्सेनिक की जीवाणु के डीएनए में भूमिका के बारे में गलत निष्कर्ष निकले। बाद के विश्लेषण से पता चला कि जीवाणु अपने डीएनए के लिए आर्सेनिक नहीं, बल्कि फास्फोरस पर निर्भर करता था, जिससे प्रारंभिक दावा गलत साबित हुआ।
Prepared by Olivia Bennett and reviewed by editorial team.
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