3000 साल पुराने एक ममीकृत मगरमच्छ के गैर-आक्रामक एक्स-रे और सीटी स्कैनिंग विश्लेषण से उसके पेट में एक कांस्य मछली का काँटा मिला। इससे पता चलता है कि मगरमच्छ को जानबूझकर पकड़ा गया था और मिस्र के देवता सोबेक को बलिदान किया गया था। डिजिटल एप्लीकेशन्स इन आर्कियोलॉजी एंड कल्चरल हेरिटेज में प्रकाशित अध्ययन, प्राचीन अनुष्ठानों को समझने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर प्रकाश डालता है। मानव ममी के विपरीत, अक्षुण्ण अंगों ने शोधकर्ताओं को मगरमच्छ के अंतिम भोजन और उसके कब्जे की विधि का निर्धारण करने की अनुमति दी। इस शोध ने प्राचीन धातु ढलाई तकनीकों में भी अंतर्दृष्टि प्रदान की।
Prepared by Olivia Bennett and reviewed by editorial team.
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